Wednesday, July 25, 2018

तेरी नफरतों से परे
खुद से मोहब्बत कर बैठी हूँ
आईने में खुद को बार बार देख
खुद से ही मोहब्बत का इजहार कर बैठी हूँ
कहती थी न इतनी नफरत न देना मुझे
मैं नयी यादो में खोई हुई
तुझे भुला कर बैठी हूँ...

जिस शाम मैं तेरा इंतजार करती थी
अब वो शाम नहीं आती
जिस आवाज का तू कभी कायल था
अब वो आवाज नहीं आती
जिन ख्वाबो का तू कभी सरदार था
उनसे खुद को मैंने  तन्हा  कर लिया है
बेखबर सो जाती हूँ रातों  को
अब तेरी याद नहीं आती....

वो प्यार था या नहीं, कह नहीं सकती
दूरिया बना ली है तूने
उसे बयां कैसे करू, अल्फ़ाज़ नहीं आते
रातों को अब वो ख्वाब नहीं आते
बेवफा कहा था तूने हमें
अब 'वफ़ा' से भी कोई खुशबू  नहीं आती
मोहब्बत कर ली है मैंने अपने आईने से
अब तेरी याद नहीं आती...

माना कभी ये दिल तेरे लिए धड़कता था
मगर अब मेरी रूह भी तेरा नाम नहीं लेती
खुद में ही खो चुकी हूँ
अब तेरी याद नहीं आती
अपनी धड़कनो से भी पुछू
तो  वो तेरा नाम नहीं लेती
मेरी चाहत थे कभी  तुम
मगर अब तेरी याद नहीं आती
तझे भूलकर खुद को अपना बना लिया है
अब तेरी  याद नहीं आती......


                                        -Mamta Gupta....

तेरी नफरतों से परे खुद से मोहब्बत कर बैठी हूँ आईने में खुद को बार बार देख खुद से ही मोहब्बत का इजहार कर बैठी हूँ कहती थी न इतनी नफरत न ...

teri yaad nhi aati...